Life 1

Family love

यमराज के वहां जाने के 7 दिन बाद पहला डब्बा खुलता है और एकदम से एक चकाचौंध कर देने वाली रोशनी वहां के बाहर निकलती है जो कमल की पहली आत्मा थी उसकी आत्मा वहां से तेज गति से निकलकर धरती की ओर आती है और आत्मा एक महिला के गर्भ में चली जाती है फिर वही से उसकी पहली जिंदगी की पहली कहानी शुरू होती है ।

इस बार वह एक बड़े परिवार में जन्म लेता है जहां उसके दो दादा होते हैं उन दोनों दादाओं के 1-1 पुत्र थे बड़े दादा के पुत्र का नाम विमल और छोटे दादा के पुत्र का नाम चिराग था विमल का विवाह एक बड़े संपन्न घर से हुआ था वही चिराग का विवाह मध्यमवर्ग परिवार से हुआ था विमल स्वभाव से कड़क एवं समय का पाबंद था वह सरकारी जॉब में था वही चिराग शांत ,कोमल और सीधे स्वभाव का व्यक्ति था उसकी पत्नी छोटे घर और किसान की पत्नी होने के कारण थोड़ी दबी हुई रहती थी।

चिराग किसान था वह दोनों दादाओं की जमीन पर खेती करता और विमल को फसल कटने के बाद उसके मुनाफे का थोड़ा हिस्सा अपने मन से उसे दे देता । विमल के तीन बच्चे थें बड़े बच्चे का नाम पृथ्वी मझले बच्चे का नाम प्रिंस और उसकी एक छोटी बेटी माया थी वही चिराग के दो बेटे थे बड़ा बेटा वीरू छोटा बेटा राम था । प्रिंस और वीरू का जन्म लगभग एक ही साथ हुआ था यही 1 महीने के अंतर रहा होगा दोनों के बीच।

अब कहानी शुरू होती है जब पृथ्वी का जन्म हुआ था घर में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी जैसे कि हमेशा पहले बच्चे के आने पर होता है सब खुश थे घर के सभी लोग उसे बहुत प्यार करते थे उसकी सारी ख्वाहिशें पूरी करते थे उसे कभी रोने नहीं देते उसका पूरा ध्यान रखते । फिर दो साल बाद दूसरे बच्चे का जन्म होता है। वह वही बच्चा है जिसकी 7 जिंदगी होती है यानि कि कमल की आत्मा ।

दूसरे बच्चे का जन्म होने वाला था घर के लोग प्रार्थना करते हैंं कि एक लड़की हो जाए ताकि परिवार पूरा हो जाए । वे पहले से ही अस्पताल चले जाते हैं और आज बच्चे का जन्म होने वाला था घर के सभी लोग गंभीर थे और शांत माहौल बना हुआ था तभी बच्चे का जन्म होता है और बच्चे की रोने की आवाज आती है और थोड़ी देर बाद नर्श कमरे से बाहर आती है ।

नर्श मुबारकबाद देती है और कहती है कि लड़का हुआ है घर वालों के चेहरे पर थोड़ी निराशता आ जाती है क्योंकि लड़की नहीं हुई । थोड़े समय बाद जो हुआ सो हुआ भगवान की मर्जी मान कर स्वीकार करते हैं और 2 दिन बाद उन्हे अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है ।

1 महीने के भीतर ही विरु का भी जन्म हो जाता है। शुरु-शुरु में प्रिंस की मां सीता ही उसका ध्यान रखती थी लेकिन वीरू के जन्म के बाद दोनों बच्चों का ज्यादा ध्यान वीरू की मां गीता ही रखती थी । कभी-कभी प्रिंस को भी वह अपना ही दूध पिला देती थी इसी तरह दोनों बच्चों का ज्यादा वहीं रखती थी और अब दोनों बच्चे बड़े होने लगे थे।

वीरू पहले चलना सीखता है और प्रिंस पीछे , वीरू हमेशा छोटे होने के बावजूद भी वह हर काम प्रिंस से पहले सीख लेता था और उसी काम को प्रिंस सीखने में लेट लगाता। जैसे कि मैने बताया वीरू पहले चलना सीखता हैं और प्रिंस बाद में।

वे दोनों बचपन में बड़े ही शरारती थे प्रिंस कभी-कभी खेलते खेलते कुछ तोड -फोड देता लेकिन वीरू भी कम नहीं था। वे दोनों बहुत शरारत करते । उन दोनों के बीच में इतना प्यार था कि अलग-अलग कमरे होने के बावजूद भी हमेशा एक साथ सोते। इसलिए ज्यादा शरारत हमेशा प्रिंस के कमरे में ही होती ।

शरारत करने पर जब भी सामान टूटता तो विमल प्रिंस को ही डांटता था अगर कभी वीरू ने भी गलती की होती तब भी वह प्रिंस को ही डाटता । कभी-कभी थप्पड़ भी मार देता लेकिन वीरु को कभी नहीं मारता गुस्सा भी उस पर थोड़ा ही करता क्योंकि वह दूसरे के बच्चे पर कैसे हाथ उठाता ।

लेकिन ऐसा करने पर प्रिंस के मन में गलत प्रभाव पड़ता था वह सोचता था कि उसके पापा उसे प्यार नहीं करते। वह जब भी वह रोते हुए उसकी मां के पास जाता तब उसकी मां भी उसे प्यार नहीं कराती क्योंकि वह हमेशा अपने आप को सजाने में व्यस्त रहती थी तब वह वीरू की मां के पास जाता और वह उसे चुप कराती है और उससे प्यार करती ।

अब दोनों बच्चों का स्कूल में दाखिला हो गया था दोनों बच्चे साथ में ही स्कूल जाते थे दोनों बच्चों के बीच इतना प्यार था कि वे हमेशा एक साथ बैठते , साथ खाना खाते, और दोनों को एक साथ दंड भी मिलता । कभी-कभी अगर एक को दंड मिलती तो दूसरा भी कुछ गड़बड़ी करके उसके साथ पीछे पीछे दंड में आ ही जा जाता ।

घर मे भी दोनों एक साथ बैठकर पढ़ते वीरू अपना कार्य पहले खत्म कर लेता था और प्रिंस का इंतजार करता। प्रिंस खाने में भी हमेशा लेट लगाता था लेकिन वीरू के बार बार कहने पर वह थोड़ा जल्दी कर लेता था ।

शुरु शुरु में विमल प्रिंस को कुछ नहीं कहता था लेकिन अब वह प्रिंस को पढ़ने के लिए डांटने लगा क्योंकि वह उसकी तुलना वीरू के साथ करने लगा था इसलिए वह उसे अब बैठकर पढ़ाने भी लगा था ।

जब उधर वीरू पढ़ाई खत्म करके मजे कर रहा होता तो विमल उसे बैठकर पढ़ाता रहता था इस पर भी प्रिंस को लगता कि उसके पापा उससे प्यार नहीं करते इसलिए उसे खेलने भी जाने नहीं देते।

इसी तरह समय बीतता है और अब दोनों कक्षा चार में पहुंच गए थे वे दोनों अगले साल नवोदय की परीक्षा देने वाले थे विमल प्रिंस को पढ़ाता था इसलिए वीरू अब अपने कमरे में ही पढ़ता था और विमल प्रिंस को उसके कमरे में बैठकर उसे पढ़ाता‌। जब उसे नहीं आता तो उसे कभी-कभी डांट भी देता, प्रिंस कभी-कभी रो भी देता था । अब भी वह जब भी रोता था अपनी छोटी मां के पास ही जाता था और वह ही उसे शांत कराती थी।

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